Monthly Archives: June 2016

Buddh Purnima

Standard

रात है आज अनोखी चाँद है फ़लक पे पूरा

चाँदनी में भींगी हुई ना है कोई कोना अधूरा

इसी चाँद ने देखा था जब इन्सान बना था बुद्ध

यही था निर्वाक साक्षी जब हो गया वो पूर्ण शुद्ध

धरती गगन और तारें सभी हैं स्थिर ये रात

जैसे मुग्ध हैं स्मरण कर के बीती हुई वो बात

आज आई है फिर वो रात चाँद है फिर फ़लक पे पूरा

याद दिला रहा हमें जीवन का उदेश्ये अब भी है अधूरा

इस चाँद को फिर एक बार बनने दो साक्षी

अंदर के बुद्ध को जगाओ उड़ने दो जैसे उन्मुक्त पक्षी

Advertisements